जनता दल यूनाइटेड या जनता दल डिवाइडेड
बिहार में आगामी विधानसा चुनाव के लिए सत्ताधारी गठबंधन ने तैयारी शुरू क्या की उसके भीतर भूचाल आ गया। जेडीयू में शीर्ष नेतृत्व में मतभेद का पता तो उसी समय चल गया था जब शरद यादव और नीतीश कुमार ने खुलेआम महिला आरक्षण के मामले पर खुलेआम अलग लाइन ले ली थी। नीतीश कुमार ने खुलेआम शरद यादव के वर्षों पुराने स्टैंड को ठेंगा दिखाते हुए महिला आरक्षण के वर्तमान स्वरुप का समर्थन किया था।
उसके बाद ललन सिंह के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का मामला सर्वविदित है। जेडीयू में शीर्ष नेतृत्व का झगड़ा अब नीचे तक दिखाई देने लगा है। नौबत मारपीट और धक्का-मुक्की तक पहुंच गयी है। मुंगेर में शरद यादव के सामने ही पार्टी के दो गुटों के बीच कहासुनी हुई। एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकी गयीं, माइक तोड़े गए। नजारा तो ऎसा था जैसे विधानसभा के भीतर धक्का-मुक्की का रीटेक दिया जा रहा हो। मुंगेर की घटना के एक दिन बाद मोतीहारी में भी जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच जमकर बवाल मचा। वहां भी एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकी गयीं। इन हालातों पर जेडीयू के नेता टीवी कैमरों के सामने भले ही कुछ न बोलें, लेकिन इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि जनता दल यूनाइटेड अब यूनाइटेड नहीं रहा। वो भी अब डिवाइडेड हो गया है।
मामला केवल जेडीयू तक ही सीमित नहीं है। मामला राज्य के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील मोदी से जुड़ा है। इस मामले को कोई निजी मामला कह सकता है। लेकिन बीते रविवार को उनके भाइयों और गुंडों ने उनकी बहन रेखा मोदी के साथ जो किया वो शर्मसार करनेवाला है। रेखा मोदी अपनी बेटी उर्वशी के साथ अपनी मां से मिलने गयी थीं। वो सुशील मोदी के दो भाईयों महावीर मोदी और उद्धव मोदी के साथ रहती हैं। रेखा मोदी के अपनी मां और भाइयों के यहां पहुंचने के बाद उनके साथ मारपीट की गयी। उनके कपड़े तक फाड़ डाले गए। ये सब कुछ खबरिया चैनलों पर दिखाया गया। इन सारे मामलों की जड़ में भाइयों और बहन के बीच संपत्ति विवाद है। लेकिन क्या संपत्ति विवाद में सुशील मोदी के भाइयों में सत्ता प्रेरित नशा इस कदर चढ़ गया है कि सरेआम एक महिला, जो उनकी सगी बहन थी, के कपड़े तक फाड़ डाले। लेकिन पूरे घटनाक्रम में सुशील मोदी की चुप्पी रहस्यमय थी।
इन घटनाओं के बाद ये तो साफ हो गया है कि बिहार में जिसके पास ताकत है चलती उसी की है। यानि जिसकी लाठी उसकी भैस। माना कि बिहार में विकास की बयार बही है, लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि विरोध के को कुचल डाला जाए। वैसे भी सत्ताधारी गठबंधन का मीडिया मैनेजमेंट जबरदस्त है। तभी तो मुंगेर में शरद यादव के सामने घटी मारपीट की घटना को बिहार के एक बड़े अखबार ने ब्लैकआउट कर दिया। लेकिन नीतीश जी याद रखिए मीडिया मैनेजमेंट आंध्रप्रदेश में चंद्रबाबु नायडू को भी काम नहीं आया। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शाइनिंग इंडिया के प्रचार के लिए पूरे तरीके से मीडिया को हाइजैक करने के बावजूद उनकी सरकार चली गयी। इसलिए नीतीश जी सावधान हो जाइए।
Popularity: 5% [?]
अमर उजाला
अमेरिका
अविनाश वाचस्पति
आईपीएल
आज तक
इंडिया टीवी
इंडिया न्यूज़
ईटीवी
एचवाई टीवी
ज़ी न्यूज़
टीआरपी
दैनिक जागरण
दैनिक भास्कर
नीतीश कुमार
प्रभात खबर
फोकस टीवी
बिहार
बिहार चुनाव
बिहार-झारखंड
भोपाल गैस त्रासदी
मीडिया
रामविलास पासवान
राष्ट्रीय सहारा
व्यंग्य
श्रवण कुमार उर्मलिया
सहारा समय
सहारा समय
स्टार न्यूज़
सहारा समय
हमला
हमार टीवी
हिन्दुस्तान
attack
bhopal gas tragedy
ETV
FOCUS TV
india news
INDIA TV
IPL
media
NDTV
STAR NEWS
TRP
TV TODAY
zee news आमने-सामने (9)
कला जगत (20)
चर्चाघर (50)
न्यूज़ रुम (238)
मीडिया चर्चा (35)
मीडिया बिज़नेस (24)
विविध (17)
WP Cumulus Flash tag cloud by Roy Tanck and Luke Morton requires Flash Player 9 or better.